नर्क में जीने को मजबूर हैं भलस्वा के लोग
दिल्ली में तमाम ऐतिहासिक जगहें आपने देखी होंगी लेकिन दिल्ली में एक नर्क भी है जिसे खुद सरकार ने बसाया है। इस नर्क का नाम है भलस्वा। शहर की आबादी से 25 किलोमीटर दूर भलस्वा में करीब 28000 लोग रहते हैं। साल 2000 में दिल्ली में जगह-जगह बनी झुग्गियों को तोड़ा गया और उसमें रहने वालों को भलस्वा में बसने के लिये ज़मीन दी गयी। तब वायदा किया गया था कि यहां रहने वालों को बुनियादी सुविधाएं सरकार मुहैया कराएगी।
गरीब बच्चों को पढ़ा रहे हैं पेंटर चंदन पाल
चंदन पाल सिंह पेशे से एक पेंटर हैं और अपनी इसी छोटी सी कमाई से वो स्कूल चलाते हैं।
विकलांग अविनाश बने दूसरों के लिए सहारा
अविनाश के लिए जिंदगी का मतलब है हंसते हुए मुश्किलों को हल करना।
सही राशन के लिए रंग लाई प्रवीण भाई की लड़ाई
पारंपरिक लोहे के तराजू से सही वज़न का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
बिजली-पानी काटी लेकिन मारिया हारे नहीं
मारिया ने अपनी कॉलोनी की पचांयत के गलत फैसलों के खिलाफ आवाज़ उठाई।
पक्षियों के बसेरे को बचाना चाहते हैं गुलदेव
गुलदेव राज जम्मू के एक गांव में मौजूद पक्षियों के एक बसेरे को बचाना चाहते है।
लोगों की सोच बदलने में जुटे संजीव
दिल्ली के संजीव बताते हैं कि तेल के पीपों से बने एक स्ट्रक्चर के जरिए हमारे आस-पास हर चीज़ बदल सकती है।

जो आप कर सकते हैं
आपका संघर्ष
अगर आप भ्रष्टाचार व प्रशासनिक ढीलेपन के खिलाफ लड़ रहे हैं तो आईबीएन-7 आपकी मदद करेगा।
अपना शहर बचाएं
स्थानीय लोग अगर सड़कों, शराब की दुकानों से परेशान हैं तो आईबीएन-7 उनकी समस्याएं उठाएगा।
युवाओं की आवाज
देश के युवाओं को आगे आकर अपने मुद्दों पर संघर्ष करने के लिए आमंत्रण।
हरियाली के रक्षक
हरियाली बढ़ाने के लिए किए गए एक छोटे से प्रयास से आप ग्रीन सीजे बन सकते हैं।





























