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मासूमों की दुर्दशा

दिल्ली में एक बच्चा जिसकी उम्र 11 से 12 होगी सारा दिन लोगों को पानी पिलाकर बहुत मुश्किल से दो वक्त की रोटी का इंतजाम करता है। इसकी रेढ़ी का वजह ही लगभग 200 किलो होगा। जिसको ढकेलते हुए इसकी हालत खराब हो रही है। ये नन्हीं सी जान और इतना वजनदार काम। सबको दिखाई देता है पर पुलिस और प्रशासन को कुछ नहीं दिखाई देता। क्या बाल मजदूरी कानून सिर्फ दिखाने के लिए है।

जो आप कर सकते हैं

आपका संघर्ष

अगर आप भ्रष्टाचार व प्रशासनिक ढीलेपन के खिलाफ लड़ रहे हैं तो आईबीएन-7 आपकी मदद करेगा।

अपना शहर बचाएं

स्थानीय लोग अगर सड़कों, शराब की दुकानों से परेशान हैं तो आईबीएन-7 उनकी समस्याएं उठाएगा।

युवाओं की आवाज

देश के युवाओं को आगे आकर अपने मुद्दों पर संघर्ष करने के लिए आमंत्रण।

हरियाली के रक्षक

हरियाली बढ़ाने के लिए किए गए एक छोटे से प्रयास से आप ग्रीन सीजे बन सकते हैं।

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